इंद्रा कल्याण कैंप के ढलाव घर में कूड़े का अंबार, आवारा मवेशियों का लगा जमावड़ा। स्थानीय लोगों ने कहा- निगम पार्षद की अनदेखी का नतीजा।
कुन्दन,संवाददाता।
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम में भाजपा की सरकार बनने के बाद एक आस जगी थी कि अब इंद्रा कल्याण विहार कैंप में सफाई व्यवस्था में सुधार होगा। लेकिन स्थिति बद से बदतर हो गई है यह कहना है कैंप के स्थानीय निवासी और भाजपा कार्यकर्त्ता गंगेश झा का।
उन्होंने कहा कि इंद्रा कल्याण विहार कैंप और आसपास के इलाके में कूड़े के ढेर एक बड़ी समस्या बने हुए हैं, जिनसे आग लगने, जहरीला धुआं निकलने (PM 2.5), बीमारियों (कैंसर, सांस की दिक्कत) का खतरा और स्थानीय लोगों (बच्चों, बुजुर्गों) को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है, जिस पर अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे, जिससे जनता में रोष है और वे आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
बता दें कि 217,डीएसआईडीसी शेड ओखला फेज-एक के समीप कूड़ा डालने के लिए ढलाव घर बना हुआ है। इंद्रा कैंप के लोग और आसपास कि फैक्ट्रीयों का कूड़ा ढलाव घर में डाला जाता है। लेकिन महीनों तक ढलाव घर से कूड़ा उठाया नहीं जाता है। जिसकी वजह से ढलावघर के कूड़े के ढेर में आवारा मवशियों का जमावड़ा लगा रहता है। कूड़े का ढेर होने से प्रदूषणकारी फैक्ट्रियों का औद्योगिक कचरा भी कूड़े के ढेर में मिल रहा है, जिससे खतरा और बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार कूड़े के ढेर में आग लगने से PM 2.5 कण हवा में फैलते हैं, जिससे सांस की गंभीर बीमारियां और प्रदूषण बढ़ रहा है। साथ ही कूड़े के ढेर रास्तों को बंद कर रहे हैं, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन और निगम पार्षद कोई समाधान नहीं निकाल रहे, जिससे इंद्रा कल्याण विहार के लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर दिन निकलने वाले के सही निपटान की व्यवस्था का अभाव और निगम पार्षद कि अनदेखी से कूड़े के ढेर बढ़ते जा रहे हैं।
वहीं, स्थानीय आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों भी समस्या हल नहीं होने पर नगर निगम के विरुद्ध आंदोलन करने की चेतावनी दे रहे हैं।
उनका कहना है कि कूड़े के ढेर प्रबंधन की विफलता, प्रदूषण, और स्वास्थ्य संकट का कारण बन रहे हैं, जिस पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

