
26 साल बाद न्याय: दिल्ली कोर्ट ने CBI के जॉइंट डायरेक्टर और रिटायर्ड ACP को दोषी ठहराया, IRS अधिकारी पर 2000 के अवैध रेड का मामला
विशेष संवाददाता, संदेश धारा-
नई दिल्ली, 19 अप्रैल 2026: तीस हजारी कोर्ट ने 18 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी और एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी को 26 साल पुराने अवैध रेड मामले में दोषी करार दिया है। कोर्ट ने पाया कि दोनों अधिकारियों ने IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के घर पर 5 बजे सुबह की रेड में शक्ति का दुरुपयोग किया, CAT के आदेश को जानबूझकर नाकाम करने के लिए कार्यवाही की गई थी।
दोषी ठहराए गए अधिकारी:
रमनीश गीर (Ramneesh Geer) — वर्तमान में CBI के जॉइंट डायरेक्टर (1994 बैच)। घटना के समय वे डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) के पद पर थे। (नोट: उन्हें 2022 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।)
वी.के. पांडे (V.K. Pandey) — रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP), घटना के समय CBI में इंस्पेक्टर के रूप में तैनात थे।
घटना क्या थी?
19 अक्टूबर 2000 को सुबह 5 बजे CBI की टीम ने पश्चिम विहार स्थित अशोक कुमार अग्रवाल के घर पर छापा मारा। कोर्ट के अनुसार:
टीम ने बाउंड्री वॉल फांदकर घर में घुसा।
स्लाइडिंग डोर तोड़ डाली।
अशोक अग्रवाल को बेडरूम से अधनंगे हालत में घसीटकर बाहर निकाला।
सीढ़ियों पर मारपीट की, जिससे उनके दाहिने हाथ में चोटें आईं (मेडिकल रिकॉर्ड्स से साबित)।
कोर्ट का मुख्य उद्देश्य
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास शशांक नंदन भट्ट ने फैसले में कहा कि पूरी रेड और गिरफ्तारी मालाफाइड (दुर्भावनापूर्ण) थी। इसका मकसद 28 सितंबर 2000 के सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के आदेश को “निरस्त” और “नाकाम” करना था, जिसमें अग्रवाल की सस्पेंशन की समीक्षा करने को कहा गया था। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों के कार्य “कानूनी कर्तव्य” से कोई “उचित संबंध” नहीं रखते थे।
दोषसिद्धि के धाराएं:
दोनों अधिकारियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की निम्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया:
धारा 323 — जानबूझकर चोट पहुंचाना
धारा 448 — आपराधिक अतिक्रमण (Criminal Trespass)
धारा 427 — नुकसान पहुंचाने वाला mischief
धारा 34 — साझा इरादे से कार्य करना
कोर्ट ने अधिकारियों की दलील खारिज कर दी कि वे CrPC की धारा 197 के तहत सरकारी कर्तव्य के संरक्षण में थे।
अगला कदम:
सजा पर बहस 27 अप्रैल 2026 को होगी। सजा सुनाई जाने के बाद दोनों अधिकारी अपील कर सकते हैं।
मामले का संदर्भ:
अशोक कुमार अग्रवाल (1985 बैच IRS) उस समय इनफोर्समेंट डायरेक्टरेट में डिप्टी डायरेक्टर थे और संवेदनशील FERA मामलों की जांच कर रहे थे। उन्होंने दावा किया था कि कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।
यह फैसला अधिकारियों द्वारा शक्ति के दुरुपयोग और न्यायिक आदेशों की अवहेलना के खिलाफ एक मजबूत संदेश माना जा रहा है। कई कानूनी विशेषज्ञ इसे “देर आए लेकिन दुरुस्त आए” न्याय का उदाहरण बता रहे हैं।

