
*तारिक नासिर ( वरिष्ठ पत्रकार* )
उटावड़ पलवल मेवात, सामाजिक बुराइयों के सैकड़ों, हजारों मसलों को संज्ञान में लेते हुए आज 25 जनवरी 2025, को मरकज खुलफा ए राशिदीन में तमाम जिम्मेदारों, सरपंचों, मौजूदा हथीन विधायक चौधरी इसराइल और हजारों दूर दराज़ के गांवों से आए मोजिजा लोगों ने महा पंचायत में हिस्सा लिया। मशहूर एडवोकेट चौधरी मुहम्मद रमजान ने भी मंच साझा किया । जिसमें सभी में मेवात में बढ़ते नशाखोरी, बेहयाई, गौहत्या, दहेज, डीजे और समाज के लिए नासूर बना “तलाक” का मुद्दा गरमाता दिखा। और सभी ने इन मसलों पर सभी ने अपने अपने व्यक्तंव दिए। की किस तरह बुराइयों से मेवात को बचाया जा सके। आपको बता दें कि दिल्ली के करीब 60 70 किलोमीटर दूर मेवात जो कि हरियाणा तथा राजस्थान के कुछ हिस्सों में बसा हुआ लाखों की आबादी का इलाका है। जहां शिक्षा का अभाव, बेरोजगारी, पिछड़ापन और सामाजिक बुराइयों से यह जाना जाने लगा है। जबकि लगभग 50 से 60 वर्ष पूर्व यह मेवात कभी तब्लीग़ जमात से पूरी दुनिया में अपनी जान, माल और वक्त को और खुदा के दिए हुए पैगाम को आम मुसलमानों को इसकी दावत (प्रचार) करने का केंद्र कहा जाता था। सामाजिक बुराई को रोकने के लिए आज गांव उटावड़ में विशाल महापंचायत हुई, हमेशा से ही यहीं से पूरी मेवात को यहां के 36 बिरादरी के बुजुर्गों की तरफ से फरमान जारी कर उन पर अंकुश लगाया जाता था। जैसे जैसे समय बढ़ता गया पंचों, राजनीतिक, कोम के जिम्मदार कहलाने वाले व्यक्तियों ने समाज के लिए कम अपने हित का ज़्यादा सोचना शुरू कर दिया ।जिसका कारण यह रहा कि आज इलाका ए मेवात बुराइयों के दलदल में धंसता चला गया, महिलाओं के हजारों “तलाक” के मसले पंचायतों में आए दिन आते हैं। पुलिस, प्रशासन के संज्ञान में आते हैं। अदालतों में मुकदमे दर्ज होते हैं । इनमें। से निपटारा होते मसले चंद गिनतियों में भी सुनने को नहीं मिलते। ऐसी ही एक पीड़ित महिला जिसके पति ने अत्याचारों की सभी हदें पार करते हुए न सिर्फ उसको मानसिक प्रताड़ना दी बल्कि ” तीन तलाक” देकर उसके साथ उसके तीन बच्चों का जीवन भी बर्बाद कर दिया। हुआ क्या? अभी तक उसका फैसला इन्हीं पंचायतों में ही दिख रहा है। नहीं लगता कि इस महिला को भी केंद्र में भाजपा शासित सरकार होने के बावजूद इंसाफ भी मिल पाएगा। आखिर क्यों बढ़ रखी है मेवात में बुराइयां? क्या यह सरपंच सिर्फ नाम के रह गए हैं? क्या अपने को 36 बिरादरी का चौधरी कहलवाना ही अब इनका काम रह गया है? क्या राजनेता सोए हुए हैं? नशाखोरी कब तक युवाओं के भविष्य को ऐसे ही खराब करेगी? गौहत्या पर कब अंकुश लगेगा? इसका जवाब शायद किसी के पास नहीं, पर होती रहेंगी पंचायतें!! मसला कुछ हल होना नहीं । होती रहेंगी पंचायतें।

