
सफदरजंग अस्पताल में आईसीयू मरीजों के लिए विशेष फॉलो-अप क्लिनिक की शुरुआत
देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में पहली पहल,आईसीयू से डिस्चार्ज मरीजों की पोस्ट-क्रिटिकल केयर पर रहेगा खास फोकस
स्वतंत्र सिंह भुल्लर नई दिल्ली
नई दिल्ली: दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आईसीयू से डिस्चार्ज हुए मरीजों के लिए एक समर्पित क्रिटिकल केयर फॉलो-अप क्लिनिक की शुरुआत की है। यह पहल भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में अपनी तरह की पहली सेवा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य गंभीर बीमारी से उबर चुके मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी बेहतर चिकित्सा मार्गदर्शन और निगरानी उपलब्ध कराना है।इस नई सेवा को सरकार के टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ई-संजीवनी के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इसके जरिए मरीज और उनके परिजन घर बैठे ही क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों से ऑनलाइन परामर्श ले सकेंगे। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह क्लिनिक हर मंगलवार और गुरुवार सुबह 10 से 11 बजे के बीच संचालित होगा।
अस्पताल के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अनिर्बन होम चौधरी ने बताया कि भारत में आईसीयू से ठीक होकर घर लौटने वाले कई मरीजों को लंबे समय तक शारीरिक कमजोरी, मानसिक थकान, याददाश्त में कमी, सांस संबंधी दिक्कतें और अन्य जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन देश में अब तक इन मरीजों के लिए व्यवस्थित पोस्ट-आईसीयू फॉलो-अप सेवाएं बहुत सीमित रही हैं।
उन्होंने कहा कि इस नई पहल का उद्देश्य उन मरीजों को निरंतर चिकित्सा सहायता देना है जो आईसीयू में इलाज के बाद भी पूरी तरह सामान्य जीवन में लौटने के लिए अतिरिक्त मार्गदर्शन और उपचार की आवश्यकता महसूस करते हैं। टेलीमेडिसिन के जरिए मरीजों को बार-बार अस्पताल आने की जरूरत भी कम होगी, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी।इस महत्वपूर्ण पहल का उद्घाटन 14 मार्च को सफदरजंग अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने किया। इस अवसर पर अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारु बाम्बा भी मौजूद रहीं और उन्होंने इस पहल को मरीजों के लिए बेहद उपयोगी बताते हुए इसकी सराहना की।
इस कार्यक्रम में अस्पताल के सभी एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट (ऐ एम एस) और क्रिटिकल केयर मेडिसिन टीम के सदस्य भी उपस्थित रहे। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि यह पहल भविष्य में देश के अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है और पोस्ट-आईसीयू केयर को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

