
पश्चिम एशिया संकट पर नौसेना की बड़ी समीक्षा, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आवाजाही अब भी सीमित
विशेष संवाददाता, संदेश धारा-
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधित समुद्री यातायात के बीच भारतीय नौसेना सतर्क हो गई है। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित द्विवार्षिक नौसेना कमांडरों के सम्मेलन में इस संकट और उससे जुड़ी ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष मंथन किया जाएगा।
सम्मेलन में खासतौर पर इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों को कैसे सुरक्षित रखा जाए। होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, वहां संघर्ष के चलते आवाजाही अब भी प्रभावित है।
सूत्रों के अनुसार, संघर्ष विराम के चार दिन बाद भी इस अहम समुद्री मार्ग पर सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो पाई है। 11 अप्रैल को केवल 17 जहाज ही इस रास्ते से गुजर सके, जो सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम है।
वहीं, केंद्र सरकार ने राहत की बात बताते हुए कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। महानिदेशालय शिपिंग (DG Shipping) के माध्यम से अब तक 2,084 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज़ में हालात लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। ऐसे में नौसेना की यह रणनीतिक बैठक आने वाले समय की चुनौतियों से निपटने के लिए अहम मानी जा रही है।

