
आवारा मवेशियों से होते जानमाल के नुकसान की जिम्मेदारी किसकी?
दक्षिणी दिल्ली के सभी इलाकों में आवारा मवेशियों का जगह-जगह लगता है जमावड़ा बढ़ रहे हैं हादसे।
कुन्दन, संवाददाता।
नई दिल्ली। देशभर में आवारा मवेशियों की समस्या दिनोंदिन विकराल होती जा रही है। जहां एक ओर आवारा मवेशी सड़क हादसों का सबब बन रहे हैं,तो दूसरी ओर आने जाने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों पर हमला कर रहे हैं। आज शहर हो या गांव, आवारा मवेशियों के आतंक से कोई अछूता नहीं हैं। इनके हर जगह घूमने से आमजन का अपने घर से बाहर निकलना दुर्भर हो रहा है। कई बार इनकी चपेट में आकर नागरिकों की मौत भी हो चुकी है।
गौरतलब है कि दक्षिणी दिल्ली में सबसे अधिक आवारा मवेशी सड़कों और कूड़े के ढेरों पर जमावड़ा लगाए होते हैं। बीते रविवार शाम लगभग पांच बजे को माँ आनंदमयी मार्ग सी- लाल चौक पर सैकड़ों आवारा मवेशियों ने जमावड़ा लगा दिया, जिसकी वजह से कालकाजी डिपो तक लम्बा जाम लगा गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि प्रतिदिन शाम के समय सी लाल चौक पर सकड़ों आवारा गायों का जमावड़ा लगाता है। कई बार दोपहिया चालकों का एक्सीडेंट भी हो जाता है।
दूसरी ओर ओखला ओधोगिक क्षेत्र में भी यही हाल है। हर रोड,कूड़े के ढेर ओर फुटपाथ पर आवारा गायों का जमावड़ा रहता है। जिसकी वजह से पर्यटन उद्योग भी है प्रभावित हो रहा है। अनेकों बार शिकायत करने के बाबजूद कोई सुनवाई नहीं होती है। जब कभी कार्यवाही होती है तो दिल्ली नगर निगमकर्मी इन गाय पालन करने वालों को पूर्व में सूचित कर देते हैं।
दरअसल, बात दुर्घटना होने तक ही सीमित नहीं है। बल्कि इन आवारा मवेशियों के आतंक से देश के पर्यटन उद्योग पर भी बुरा प्रभाव पड़ने लगा है। भारत घूमने आये कई विदेशी पर्यटक इन आवारा मवेशियों की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं। कुछ साल पहले जयपुर में अर्जेंटीना के एक विदेशी पर्यटक को आवारा सांड़ ने इतनी बुरी तरह से मार दिया था कि उसकी तुरंत मौत हो गयी। निश्चित ही इससे देश में घूमने आने वाले विदेशी सैलानियों में भय का माहौल पैदा हो रहा हैं और उनकी भारत आने में रुचि भी कम हो रही हैं. वहीं ये आवारा मवेशी दूसरों की जान लेने व नुकसान पहुंचाने के साथ ही गलियों और सड़कों के किनारे पड़े कूड़ा करकट व पॉलिथीन की थैलियों को निगल कर अपनी जान से भी हाथ धो रहे हैं। असमय कई काल कवलित होने वाले ये आवारा मवेशी मरने के बाद भी आमजन को परेशान करते हैं। कई दिनों तक इनकी लाश सड़ती रहती है। स्थानीय प्रशासन इस पर ध्यान नहीं देता है।
सवाल है कि आखिर कैसे घूम रहे हैं आवारा मवेशी और कौन है इनका असली मालिक? साथ ही इनसे होने वाले नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है? पशुपालन और डेयरी विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 20वीं पशुधन गणना से ज्ञात होता है कि देश में 50.21 लाख आवारा मवेशी सड़कों पर विचरण कर रहे हैं। वास्तव में आवारा मवेशियों के बढ़ने का कारण उनका परित्याग है, जिसके कारण उनमें अनियंत्रित प्रजनन होता है, परिणामस्वरूप उनकी कई पीढ़ियां बन जाती हैं जिससे उनकी संख्या में निरंतर वृद्धि होती है।
दूसरा कारण, लोग आक्रामकता, चिकित्सकीय समस्याओं, पालतू जानवरों के स्वामित्व की लागत, प्रजनन में जटिलताओं, जीवनशैली में परिवर्तन से स्वास्थ्य जैसी कठिनाइयों के कारण आवारा मवेशियों को पालने में संकोच करते हैं। मालिकों के लिए वित्तीय मुद्दे, आवास की समस्याएं, पंजीकरण के लिए कानूनी कार्यवाही भी लोगों को जानवरों को अपनाने में बाधक बनती है। बड़ी संख्या में आवारा मवेशियों में गायों और सांडों को अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें से अधिकांश गायों को अवैध या अपंजीकृत डेयरियों और पशुशालाओं के मालिकों द्वारा छोड़ दिया जाता है। प्रजनन क्षमता में कमी, बुढ़ापा, दुग्ध उत्पादन बंद होने के कारण मवेशियों को मालिकों द्वारा छोड़ दिया जाता है। इसके अलावा दूध न देने वाले मवेशियों को मालिक खुला छोड़ देते हैं, ताकि वे बाहर खुले में चर सके और घर का चारा बच सके। ये हाल तब है जब देश में रजिस्टर्ड गोशाला की संख्या 1800 है।
जानकारों ने बताया कि आवारा मवेशियों के गलियों गलियों में इसलिए घूमते हैं कि लोग उन्हें कुछ खाने को देते हैं। अगर लोग उन्हें अपने घरों का बचा हुआ खाना नहीं दें, तो हो सकता है कि वे गलियों में घूमना बंद कर दें। दूसरी बात, आवारा मवेशियों में गाय, कुत्ते ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है। हां, गुस्सैल सांडों की लड़ाई कभी-कभार नागरिकों को चपेट में लेकर उन्हें नुकसान पहुंचा देती है। इसलिए सांडों को खुला छोड़ना ‘आ बैल मुझे मार’ की कहावत को चरितार्थ करना है।

