
साहिल मंसूरी, संदेश धारा –
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा दक्षिण, मध्य एवं पश्चिमी दिल्ली के लिए जारी किए गए डीबीएफओटी म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) टेंडर को लेकर अब जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। तमाम वार्डों के सदस्यों व जागरूक नागरिकों ने टेंडर संख्या EE (EMS)/SZ, CNZ & WZ/2025-26/D-806 पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे दिल्ली की वायु गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब राजधानी पहले ही वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति से जूझ रही है, ऐसे में टेंडर में 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) फ्लीट को अनिवार्य न करना एमसीडी की नीतिगत विफलता को दर्शाता है। इससे ठेकेदारों द्वारा सस्ते और प्रदूषणकारी डीज़ल वाहनों के उपयोग की आशंका बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर में मेकैनाइज्ड ईवी स्वीपिंग एवं एकीकृत धूल नियंत्रण जैसे अहम प्रावधानों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया है, जबकि सड़क की धूल दिल्ली में प्रदूषण का एक प्रमुख कारण मानी जाती है। उनका कहना है कि यदि आधुनिक तकनीक को शामिल नहीं किया गया, तो “विश्व-स्तरीय दिल्ली” का दावा केवल कागज़ी बनकर रह जाएगा।
तमाम वार्डों के सदस्यों व नागरिकों ने एमसीडी से मांग की है कि टेंडर की शर्तों में तत्काल संशोधन करते हुए—
पहले दिन से 100% ईवी-ओनली फ्लीट,
मेकैनाइज्ड ईवी स्वीपिंग के ज़रिए एकीकृत डस्ट कंट्रोल,
तथा जीपीएस ट्रैकिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और उल्लंघन पर ब्लैकलिस्टिंग जैसे सख्त प्रवर्तन तंत्र को अनिवार्य किया जाए।
जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, तो इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए इसे उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक स्तर तक उठाया जाएगा।
नागरिकों का कहना है कि दिल्ली के लोगों को केवल कूड़ा प्रबंधन नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार भी चाहिए, और एमसीडी को अल्पकालिक आर्थिक लाभ के बजाय जनहित को
प्राथमिकता देनी होगी।

