नई दिल्ली।दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर ग्रेप-4 (GRAP-4) जैसे सख्त नियम लागू हैं। मीडिया में रोज़ाना खबरें, चेतावनियाँ और सरकारी दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इन खबरों का ज़मीन पर कोई असर नहीं दिख रहा।
मदनपुर खादर ईस्ट इलाके में गुप्ता ट्रेडर्स (निर्माण चौक) और इक़बाल मलिक (समोसा चौक) के आसपास आज भी ट्रक, डंपर और ट्रैक्टरों से खुलेआम निर्माण सामग्री का स्टॉक और सप्लाई की जा रही है। GRAP-4 के तहत प्रतिबंधित गतिविधियाँ दिन-दहाड़े जारी हैं, मानो नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित हों।
स्थानीय लोगों का कहना है कि
मीडिया में खबरें चलती हैं
नेताओं के बयान आते हैं
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सख्ती की बात करते हैं
लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं होता।
इलाके में उड़ती धूल, सड़कों पर बिखरा मटेरियल और भारी वाहनों की आवाजाही से प्रदूषण चरम पर है। इसके बावजूद न तो ट्रक जब्त हो रहे हैं, न ही डंपिंग बंद कराई जा रही है। इससे यह सवाल उठता है कि—
क्या GRAP-4 सिर्फ प्रेस रिलीज़ के लिए है?
क्या नियम आम जनता के लिए हैं, कारोबारियों के लिए नहीं?
आखिर किसके संरक्षण में यह सब हो रहा है?
स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक विभाग जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं, जिससे नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है और दिल्ली की हवा और ज़हरीली बनती जा रही है।
अब ज़रूरत सिर्फ खबर चलाने की नहीं, बल्कि जमीन पर सख्त और दिखने वाली कार्रवाई की है। वरना GRAP-4 भी दिल्ली में सिर्फ एक और बेअसर नियम बनकर रह जाएगा।