
धर्मांतरण के आरोप निराधार—पुलिस का स्पष्ट खंडन
विशेष संवाददाता, संदेश धारा-
नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया पॉलिटेक्निक में 19 जनवरी 2026 को एक गंभीर विवाद सामने आया, जिसमें संस्थान के एक कर्मचारी ने सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एक एसोसिएट प्रोफेसर पर शारीरिक मारपीट और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, परिसर के भीतर दोनों के बीच कहासुनी बढ़ने के बाद हाथापाई हुई।
पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ाई जा रही है और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच पुलिस ने सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों पर फैलाई जा रही भ्रामक खबरों का खंडन किया है। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा किसी भी प्रकार के जबरन धर्मांतरण का कोई आरोप नहीं लगाया गया है। इस तरह की खबरें तथ्यहीन और निराधार हैं।
प्रशासन ने मीडिया और आम लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और जांच पूरी होने तक संयम बरतें, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित न हो और सामाजिक सौहार्द बना रहे।
मामले में आगे की जानकारी जांच पूरी होने के बाद साझा किए जाने की बात कही गई है।

