लाइसेंस के नाम पर उगाही का आरोप, मीट दुकानदारों में आक्रोश

MCD के Veterinary विभाग के एल,आई,पर गंभीर सवाल, वार्डों में निजी युवकों से वसूली कराने की चर्चा
साहिल मंसूरी संदेश धारा-
नई दिल्ली। Municipal Corporation of Delhi के Veterinary Services Department से जुड़े एक Licensing Inspector (LI) पर मीट और मुर्गा दुकानदारों से लाइसेंस व निरीक्षण के नाम पर कथित “मंथली उगाही” कराने के आरोप सामने आए हैं। संबंधित वार्डों में तैनात LI कैलाश के खिलाफ दुकानदारों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
दुकानदारों का कहना है कि लाइसेंस जारी/नवीनीकरण और निरीक्षण के दौरान आपत्तियों का हवाला देकर अतिरिक्त रकम मांगी जाती है। आरोप है कि तय सरकारी फीस के अलावा नियमित रूप से नकद राशि की मांग की जाती है। कुछ व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “रकम न देने पर चालान या सीलिंग की चेतावनी दी जाती है।”
निजी युवकों के जरिए वसूली का आरोप
व्यापारियों का यह भी दावा है कि वार्ड-वाइज कुछ निजी युवकों को कथित तौर पर वसूली के लिए लगाया गया है, जो अधिकारी के नाम पर दुकानों से पैसे मांगते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
आधिकारिक प्रक्रिया क्या कहती है?
मीट दुकानों का लाइसेंस और निरीक्षण कार्य Veterinary Services Department के अधीन होता है। विभागीय नियमों के अनुसार अधिकृत शुल्क निर्धारित होता है और किसी निजी व्यक्ति को वसूली का अधिकार नहीं है।
जांच की मांग
दुकानदारों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि अधिकृत फीस सूची सार्वजनिक की जाए। उन्होंने विजिलेंस जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
विभाग का पक्ष शेष
इस संबंध में संबंधित अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया। उनका पक्ष प्राप्त होते ही प्रकाशित किया जाएगा।
(नोट: समाचार में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। जांच के बाद ही तथ्य स्पष्ट होंगे।)

