
ओखला औद्योगिक थाना क्षेत्र में पुलिस बूथों पर उठे सवाल पुलिस कर्मचारी कम, ठेकेदारी ज्यादा होने के आरोप
विशेष संवाददाता, संदेश धारा-
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के ओखला औद्योगिक थाना क्षेत्र में स्थित कुछ पुलिस बूथों को लेकर स्थानीय लोगों और व्यापारियों के बीच गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जिन पुलिस बूथों का उद्देश्य क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखना और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना है, वहीं कुछ स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी से अधिक “ठेकेदारी संस्कृति” हावी होती दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में अवैध बोरिंग, अवैध सीवर लाइन डालने, बिना अनुमति पेड़ों की कटाई, अवैध रेहड़ी-पटरी लगाने और अवैध निर्माण जैसी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। आरोप है कि इन कार्यों को रोकने के बजाय कुछ जगहों पर इनके लिए कथित तौर पर संपर्क सूत्र तक बताए जाते हैं। इससे यह धारणा बन रही है कि पुलिस बूथों का उपयोग कानून व्यवस्था के बजाय अवैध गतिविधियों के “प्रबंधन” के लिए किया जा रहा है।
क्षेत्र के कई लोगों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां पहले से ही पानी की भारी किल्लत है, लेकिन इसके बावजूद बड़े पैमाने पर अवैध बोरिंग कर पानी निकाला जा रहा है। इसी तरह बिना किसी अनुमति के सीवर लाइनें डाली जा रही हैं, जिससे नगर निगम और संबंधित विभागों को राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ क्षेत्र में अव्यवस्था भी बढ़ रही है।
पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। आरोप है कि कई स्थानों पर बिना अनुमति पेड़ों की कटाई की जा रही है, जबकि दिल्ली में पेड़ काटने के लिए संबंधित विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके अलावा सड़कों और फुटपाथों पर अवैध रेहड़ी-पटरी लगाने से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि पुलिस बूथों का उद्देश्य जनता की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण होना चाहिए, न कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की भूमिका।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों और प्रशासन को इस पूरे मामले की जांच करानी चाहिए और यदि कहीं भी लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि क्षेत्र में कानून व्यवस्था और पारदर्शिता बनी रहे।

