
ओज़ोन क्षेत्र में अवैध निर्माण का ‘खुला खेल’! वार्ड 185 में AE, EE और SE की मिलीभगत के आरोप, MCD की कार्रवाई सिर्फ दिखावा?
📍 नई दिल्ली (कालिंदी कुंज/मदनपुर खादर एक्सटेंशन)
राजधानी दिल्ली के Municipal Corporation of Delhi के सेंट्रल जोन अंतर्गत वार्ड 185 में अवैध निर्माण का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। कंचन कुंज, मक्की मस्जिद कॉलोनी और मदनपुर खादर एक्सटेंशन पार्ट-2 व 3 में न केवल नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि ओज़ोन (पर्यावरण संवेदनशील) क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर बहुमंजिला अवैध इमारतें खड़ी की जा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण होना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। बेसमेंट सहित 4 से 6 मंजिल तक की इमारतें बिना नक्शा पास कराए तेजी से तैयार हो रही हैं, जो पर्यावरण और सुरक्षा—दोनों के लिए खतरा बन सकती हैं।
📌 अधिकारियों की मिलीभगत के गंभीर आरोप
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सब Municipal Corporation of Delhi के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों—AE, EE और SE—की जानकारी और संरक्षण के बिना संभव नहीं है। आरोप है कि “फिक्स रेट सिस्टम” के तहत प्रति गज राशि तय कर अवैध निर्माण को नजरअंदाज किया जा रहा है।
📌 MCD की कार्रवाई—सिर्फ कागजों तक सीमित?
निगम द्वारा समय-समय पर सीलिंग, नोटिस और आंशिक तोड़फोड़ जैसी कार्रवाई की जाती है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल दिखावा भर है। कुछ समय बाद वही निर्माण फिर से शुरू हो जाता है, जिससे स्पष्ट होता है कि कार्रवाई में गंभीरता की कमी है।
📌 पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध
वहीं, Delhi Police की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उच्च स्तर पर भले ही अवैध निर्माण से दूरी की बात कही जाती हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर बीट स्टाफ की कथित संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।
📌 शिकायतों का अंबार, कार्रवाई नदारद
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार भूमाफिया और बिल्डरों के खिलाफ शिकायतें की गई हैं, जिनमें सरकारी भूमि पर कब्जा और अवैध निर्माण जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं हुई है।
⚠️ पर्यावरण और सुरक्षा पर खतरा
ओज़ोन/संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह का अनियंत्रित निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में बड़े हादसों को भी न्योता दे सकता है।
❗ जनता का सवाल:
क्या वार्ड 185 में अवैध निर्माण अधिकारियों की मिलीभगत से ही संचालित हो रहा है?
क्या MCD की कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है?
और कब तक चलता रहेगा यह ‘रेट सिस्टम’?

