
दिल्ली में LPG संकट: छोटे कारोबार ठप, मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट
साहिल मंसूरी संदेश धारा-
नई दिल्ली,राजधानी दिल्ली में इन दिनों एलपीजी (LPG) की भारी किल्लत ने छोटे व्यवसायों और कामगारों के सामने गंभीर आजीविका संकट खड़ा कर दिया है। सरकार जहां घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने की बात कर रही है, वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी और कालाबाजारी ने रेहड़ी-पटरी वालों, ढाबा संचालकों और छोटे होटलों की कमर तोड़ दी है।
छोटे कारोबारियों पर सीधा असर
दिल्ली के कई इलाकों जैसे आनंद विहार और साकेत में गैस की अनुपलब्धता के कारण छोटे होटल, ढाबे और फास्ट-फूड स्टॉल अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं। कई व्यापारियों का कहना है कि सिलेंडर नहीं मिलने से रोजाना का कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
वहीं, कुछ रेस्टोरेंट मालिकों ने ईंधन बचाने के लिए अपने मेन्यू में भारी कटौती कर दी है और केवल सीमित व्यंजन जैसे दाल-चावल ही परोसे जा रहे हैं।
कालाबाजारी ने बढ़ाई परेशानी
स्थिति का फायदा उठाते हुए कालाबाजारी भी चरम पर है। कमर्शियल गैस सिलेंडर, जो पहले सामान्य दरों पर उपलब्ध थे, अब कथित रूप से ₹4,000 से ₹5,000 तक में बेचे जा रहे हैं। इससे छोटे कारोबारियों के लिए काम जारी रखना लगभग असंभव हो गया है।
मजदूर वर्ग पर दोहरी मार
इस संकट का सबसे ज्यादा असर मजदूर और कामगार वर्ग पर पड़ रहा है। छोटे प्रतिष्ठानों के बंद होने से वेटर, रसोइये और सफाई कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में हैं।
कई जगहों पर कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा जा रहा है या उनके वेतन में कटौती की जा रही है। मजबूरी में कई मजदूर अब खाना पकाने के लिए लकड़ी और उपलों जैसे पारंपरिक ईंधनों का सहारा ले रहे हैं, जिनकी कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं।
सरकार का पक्ष और कार्रवाई
दिल्ली सरकार ने कमर्शियल एलपीजी के लिए नई राशनिंग नीति लागू की है, जिसके तहत औसत खपत का केवल 20% ही आवंटित किया जा रहा है।
केंद्र सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और किसी प्रकार की कमी नहीं है।
वहीं, जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली पुलिस और संबंधित एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं। हाल ही में दक्षिण दिल्ली में एक अवैध डिपो से 223 गैस सिलेंडर जब्त किए गए।
अंतरराष्ट्रीय कारण बना संकट की जड़
विशेषज्ञों के अनुसार यह संकट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान-इजरायल विवाद के चलते ‘स्ट्रेट ऑफ हार्मुज’ समुद्री मार्ग के बाधित होने से उत्पन्न हुआ है। यही मार्ग भारत के लिए एलपीजी आयात का एक प्रमुख रास्ता है।
निष्कर्ष
दिल्ली में एलपीजी की यह कमी केवल ईंधन संकट नहीं, बल्कि हजारों छोटे व्यापारियों और कामगारों की आजीविका पर सीधा प्रहार है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और गहरा सकता है।

