
ओखला ओधोगिक क्षेत्र में डीडीए शेड एसोसिएशन के सदस्यों पर क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ कटाई के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
विशेष संवाददाता।
नई दिल्ली (ओखला)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक ओर सरकार और प्रशासन पर्यावरण संरक्षण, ग्रीन दिल्ली और प्रदूषण नियंत्रण की बातें कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ओखला DDA शेड क्षेत्र से हरियाली को नुकसान पहुँचाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि ओखला DDA शेड एसोसिएशन से जुड़े कुछ लोगों ने एसोसिएशन मेंबर की सहमति से अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई करवाई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में कई वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को बिना किसी वैध अनुमति के काट दिया गया है। यह कटाई न तो वन विभाग की स्वीकृति से हुई और न ही इसके लिए पर्यावरणीय मानकों का पालन किया गया। पेड़ों की कटाई से न केवल इलाके की हरियाली नष्ट हो रही है, बल्कि प्रदूषण और तापमान में भी इजाफा हो रहा है।
गुप्त सूत्रों के मुताबिक एसोसिएशन के सदस्य निजी स्वार्थ के लिए पेड़ों क़ो काट देते हैं। उन्होंने बताया कि बीते कुछ महीने पहले भी ठक्कर गेट के साथ एक बड़े पेड़ क़ो काट दिया गया और अब बीते शनिवार क़ो अन्य पेड़ों की 25 शाखाओं क़ो बिना अनुमति काट दिया गया है। उन्होंने कहा कि गेट पर डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगा दिया गया है,जो पेड़ों की आड़ में होने से दिखाई नहीं दे रहा था। निजी स्वार्थ,एडवरटाइजिंग के लिए डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड क़ो दर्शाने के लिए पेड़ो क़ो काट दिया गया।
स्थानीय लोगों में रोष
पेड़ कटाई की घटना सामने आने के बाद क्षेत्रवासियों और पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पेड़ किसी व्यक्ति या संस्था की निजी संपत्ति नहीं होते, बल्कि यह समाज और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं। इसके बावजूद पेड़ माफिया ने विभाग की बिना सहमति से,पर्यावरण कानूनों को खुलेआम नजरअंदाज किया।
नियमों की खुलेआम अनदेखी
जानकारों के मुताबिक, दिल्ली में किसी भी पेड़ को काटने के लिए संबंधित विभाग से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति पेड़ काटना दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का सीधा उल्लंघन है, जिसमें जुर्माने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि इतनी गंभीर पर्यावरणीय क्षति के बावजूद संबंधित विभागों की चुप्पी क्यों है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पूरा इलाका कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो सकता है।
जांच और कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों की मांग है कि—
मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
पेड़ माफिया और अन्य दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
काटे गए पेड़ों के बदले नए पौधे लगाए जाएं।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
पर्यावरण बचाने की अपील
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या विकास के नाम पर पर्यावरण का विनाश जायज़ है? जरूरत है कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और आम लोग मिलकर हरियाली बचाने के लिए ठोस कदम उठाएं।

