
विशेष संवाददाता संदेश धारा- नई दिल्ली।
दिल्ली नगर निगम (MCD) के स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से एक ही वार्ड में जमे DBC, MTS और CFW (मल्टी टास्किंग स्टाफ) कर्मचारियों का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। नियमों के अनुसार कर्मचारियों का समय-समय पर स्थानांतरण होना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
सूत्रों के अनुसार कई कर्मचारी ऐसे हैं जो 3, 5 और 6 वर्षों से भी अधिक समय से एक ही वार्ड में तैनात हैं। न तो इनका ट्रांसफर किया जा रहा है और न ही इस पर कोई ठोस कार्रवाई सामने आ रही है। इससे न सिर्फ प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, बल्कि यह भी संदेह पैदा होता है कि आखिर विभाग को या संबंधित अधिकारियों को इससे क्या लाभ मिल रहा है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमे रहने से भ्रष्टाचार, पक्षपात और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभाग में यह स्थिति जनहित के साथ सीधा खिलवाड़ है। डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम में लगे कर्मचारियों का निष्पक्ष और जवाबदेह होना बेहद जरूरी है।
इस गंभीर विषय पर MHO श्री रावत जी एवं एडिशनल कमिश्नर (हेल्थ) से विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कराया जा रहा है। विभाग से अपेक्षा है कि वे इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए वर्षों से एक ही वार्ड में जमे कर्मचारियों की तत्काल समीक्षा करें और नियमानुसार स्थानांतरण सुनिश्चित करें।
इतना ही नहीं, मलेरिया इंस्पेक्टर्स का जॉन (ज़ोन) ट्रांसफर कई वर्षों से प्रक्रियाधीन होने के बावजूद फाइलों में ही दबा हुआ है। बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, जिससे कार्यप्रणाली पर और भी गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। जनहित को देखते हुए मांग की जा रही है कि मलेरिया इंस्पेक्टर्स का भी तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर किया जाए, ताकि किसी भी तरह के हितों के टकराव और लापरवाही पर रोक लग सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रांसफर नीति को सख्ती से लागू किया जाए, तो न केवल कार्यकुशलता बढ़ेगी बल्कि जनता का विश्वास भी बहाल होगा। अब आवश्यकता है कि MCD के उच्च अधिकारी इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करें, अन्यथा यह विषय आने वाले समय में बड़े प्रशासनिक विवाद का रूप ले सकता है।

