
भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता बना सियासी घमासान
किसान संगठनों ने बताया ‘अमेरिकी दबाव में आत्मसमर्पण’, 12 फरवरी को भारत बंद का ऐलान
विशेष संवाददाता, संदेश धारा-
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच घोषित अंतरिम व्यापार समझौते ने देश की राजनीति में तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। जहां केंद्र सरकार इसे किसानों, एमएसएमई और मछुआरों के लिए लाभकारी बता रही है, वहीं किसान संगठन और विपक्ष इसे अमेरिकी दबाव में किया गया समझौता बताते हुए खुलकर विरोध में उतर आए हैं।
समझौते का विवरण
6 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए फोन कॉल के बाद इस अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की गई। समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है।
इसके बदले भारत ने रूसी तेल के आयात पर रोक लगाने और अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के ऊर्जा, तकनीक, विमान और कृषि उत्पाद खरीदने का वादा किया है।
सरकार का पक्ष
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में स्पष्ट किया कि इस समझौते में भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि देश में कोई भी जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) कृषि उत्पाद नहीं आएगा और किसी भी ऐसी वस्तु को शामिल नहीं किया गया है जिससे भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचे।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे किसानों, एमएसएमई और मछुआरों के लिए ऐतिहासिक करार दिया। वहीं भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने समझौते को “सभी डील का पिता” बताते हुए इसे क्रिकेट की भाषा में “छक्का” करार दिया।
विपक्ष का हमला
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों की मेहनत को बेच दिया है और अब भारत “ट्रंप-निर्भर” हो गया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और कर्नाटक मंत्री प्रियंक खरगे ने शुल्क में असमानता और भारतीय हितों की अनदेखी को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस का आरोप है कि यह समझौता वाशिंगटन के दबाव में किया गया है।
किसानों का उग्र विरोध
संयुक्त किसान मोर्चा ने इस समझौते को “अमेरिकी कंपनियों के सामने आत्मसमर्पण” करार देते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग की है।
किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने चेतावनी दी कि अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों को भारी नुकसान होगा।
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने ग्रामीण इलाकों में विरोध तेज करने का आह्वान किया है। किसान संगठनों ने 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान ट्रंप और मोदी के पुतले जलाकर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
बढ़ता राजनीतिक तनाव
भारत–अमेरिका व्यापार समझौता अब सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में किसान आंदोलन और विपक्ष के दबाव से सरकार की राह और कठिन होती नजर आ रही है।

