
ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में ‘मौत का फंदा’ इमरजेंसी गलियों पर कब्जा, बड़े हादसे का खतरा
साहिल मंसूरी, संदेश धारा-
नई दिल्ली: राजधानी के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में एक गंभीर लापरवाही सामने आई है, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। फैक्ट्रियों के पीछे बनाई गई 10 से 15 फुट चौड़ी इमरजेंसी गलियां—जो आपदा के समय राहत और बचाव के लिए बनाई गई थीं—आज लगभग पूरी तरह अवैध कब्जों की भेंट चढ़ चुकी हैं।

इन गलियों में झुग्गी-झोपड़ियां, कबाड़ के ढेर, प्लास्टिक, टायर और अन्य ज्वलनशील सामग्री भरी पड़ी है। हालात ऐसे हैं कि यदि आग जैसी आपदा आती है, तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके तक पहुंच ही नहीं पाएंगी।
🚒 “फायर ब्रिगेड 200 मीटर दूर खड़ी रह जाएगी”
एक फैक्ट्री मालिक (नाम गोपनीय) ने बताया,
“अगर रात में आग लग गई तो फायर टेंडर अंदर घुस ही नहीं पाएगा। हमें खुद आग बुझानी पड़ेगी, जबकि केमिकल फैक्ट्री में एक चिंगारी पूरे इलाके को जला सकती है।”
📜 आदेश तो आए, कार्रवाई नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च 2022 में ओखला इंडस्ट्रियल एरिया से अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए थे और संबंधित एजेंसियों—SDMC और DSIIDC—को कड़ी फटकार भी लगाई थी। लेकिन चार साल बाद भी हालात जस के तस हैं।
🔥 हादसों का डरावना इतिहास
जून 2024: फेज-2 की फैक्ट्री में भीषण आग
मार्च 2025: वेयरहाउस में आग, बड़ा हादसा टला
2021: 20 से ज्यादा झोपड़ियां जलकर खाक
दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान में साफ चेतावनी दी गई है कि इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में अवैध कब्जा और कंजेशन आग के बड़े कारण हैं—फिर भी जिम्मेदार एजेंसियां निष्क्रिय हैं।
🧱 जमीनी हकीकत
फैक्ट्रियों के पीछे की गलियों में:
कबाड़ के ऊंचे ढेर
झुग्गियों की दीवारें
मोटरसाइकिल और साइकिल
बच्चों के खेलने का सामान
ऐसी स्थिति में किसी भी आपदा के दौरान न तो एंबुलेंस पहुंचेगी, न ही दमकल।
👷 मजदूरों में डर
स्थानीय मजदूर राम सिंह बताते हैं,
“हम यहां दिन-रात काम करते हैं। अगर आग लगी तो भागने का रास्ता भी नहीं मिलेगा। बच्चे और बुजुर्ग सब फंस जाएंगे।”
❗ क्यों बन रही है यह खतरनाक स्थिति?
कबाड़ी सस्ते में स्क्रैप खरीदकर यहीं जमा करते हैं
रोजगार के लिए आए लोग झुग्गियां बनाकर बस गए
फैक्ट्रियां चुप हैं क्योंकि उन्हें सस्ता निस्तारण मिल रहा है
⚖️ नियमों की खुली अनदेखी
Unified Building Bye-Laws (UBBL) 2016 और दिल्ली मास्टर प्लान के अनुसार:
सर्विस लेन और रियर सेटबैक अनिवार्य हैं
फायर सेफ्टी के लिए खुला रास्ता जरूरी है
इन पर कब्जा गंभीर गैरकानूनी (Non-compoundable violation) है
फिर भी MCD, DDA और DSIIDC की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
❓ बड़ा सवाल
अगली आग कब लगेगी?
इस बार कितने लोग जान गंवाएंगे?
क्या एजेंसियां हादसे का इंतजार कर रही हैं?
📢 जनता की मांग
तत्काल सर्वे कराया जाए
सभी अवैध कब्जे हटाए जाएं
इमरजेंसी गलियों को खाली कराया जाए
फायर हाइड्रेंट, लाइटिंग और CCTV लगाए जाएं
(यह रिपोर्ट स्थानीय निवासियों, फैक्ट्री मालिकों और सरकारी दस्तावेजों पर आधारित है। सभी संवेदनशील नाम गोपनीय रखे गए हैं।)

